तेरे पास आऊ या ठहर जाऊ,,मेरे कदम भी थिरक उठते है,, | हिंदी शायरी

"तेरे पास आऊ या ठहर जाऊ,,मेरे कदम भी थिरक उठते है,,मैं आना चाहता हूँ भीतर को तेरे,,,पर मेरे ज़ज़्बात अब लंगड़े हो गए✍️ ©Anupam singh"

 तेरे पास आऊ या ठहर जाऊ,,मेरे कदम भी थिरक उठते है,,मैं आना चाहता हूँ भीतर को तेरे,,,पर मेरे ज़ज़्बात अब लंगड़े हो गए✍️

©Anupam singh

तेरे पास आऊ या ठहर जाऊ,,मेरे कदम भी थिरक उठते है,,मैं आना चाहता हूँ भीतर को तेरे,,,पर मेरे ज़ज़्बात अब लंगड़े हो गए✍️ ©Anupam singh

#walkalone

People who shared love close

More like this

Trending Topic