दो पल के लिए तो हम जरूर टूट सकते हैं। उनके खयाल के | हिंदी Poetry

"दो पल के लिए तो हम जरूर टूट सकते हैं। उनके खयाल के गुरुत्वाकर्षण की मोह में आ कर, उनकी चाहत में उल्का पिंड जैसा खुदको जला कर, उनसे मिलने की कोशिश में धरती पर स्वयं को बिखेर कर, जाने अनजाने में उनके जिंदगी से लुप्त भी हो सकते है। बदले स्वरूप में वो पहले वाला इंसान कहां रहेगा मुझमें, नजरें उठा कर जब वो वापस निकलेंगे मेरी खोज में, ढूंढ न पाएंगे ना धरती में ना आकाश में, तारों के बीच मेरी कमी उनको भी कुछ सीखा जायेगी, कुछ प्यार भरे शब्दों की किल्लत उन्हें भी कभी उसी तरह सताएगी। ©Amitesh Anand"

 दो पल के लिए तो हम जरूर टूट सकते हैं।
उनके खयाल के गुरुत्वाकर्षण की मोह में आ कर,
उनकी चाहत में उल्का पिंड जैसा खुदको जला कर,
उनसे मिलने की कोशिश में धरती पर स्वयं को बिखेर कर,
जाने अनजाने में उनके जिंदगी से लुप्त भी हो सकते है।

बदले स्वरूप में वो पहले वाला इंसान कहां रहेगा मुझमें,
नजरें उठा कर जब वो वापस निकलेंगे मेरी खोज में,
ढूंढ न पाएंगे ना धरती में ना आकाश में,
तारों के बीच मेरी कमी उनको भी कुछ सीखा जायेगी,
कुछ प्यार भरे शब्दों की किल्लत उन्हें भी कभी उसी तरह सताएगी।

©Amitesh Anand

दो पल के लिए तो हम जरूर टूट सकते हैं। उनके खयाल के गुरुत्वाकर्षण की मोह में आ कर, उनकी चाहत में उल्का पिंड जैसा खुदको जला कर, उनसे मिलने की कोशिश में धरती पर स्वयं को बिखेर कर, जाने अनजाने में उनके जिंदगी से लुप्त भी हो सकते है। बदले स्वरूप में वो पहले वाला इंसान कहां रहेगा मुझमें, नजरें उठा कर जब वो वापस निकलेंगे मेरी खोज में, ढूंढ न पाएंगे ना धरती में ना आकाश में, तारों के बीच मेरी कमी उनको भी कुछ सीखा जायेगी, कुछ प्यार भरे शब्दों की किल्लत उन्हें भी कभी उसी तरह सताएगी। ©Amitesh Anand

दो पल के लिए तो हम जरूर टूट सकते हैं।
उनके खयाल के गुरुत्वाकर्षण की मोह में आ कर,
उनकी चाहत में उल्का पिंड जैसा खुदको जला कर,
उनसे मिलने की कोशिश में धरती पर स्वयं को बिखेर कर,
जाने अनजाने में उनके जिंदगी से लुप्त भी हो सकते है।

बदले स्वरूप में वो पहले वाला इंसान कहां रहेगा मुझमें,
नजरें उठा कर जब वो वापस निकलेंगे मेरी खोज में,

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