एक इंतज़ार... महोबत। ( Ek Intezaar... Mahobbat ) Nazam Dastan A painful love stroy
एक इंतज़ार... महोबत। मेरी जिंदगी की मेरी पहली नज़्म शायरी में से सबसे पहली नज़्म शायरी है जो ना जाने कब एक दास्तां बन गई। वर्ष 2016 के दौरान जब मेरी प्रथम कविताओं की पुस्तक एहसास प्रकाशित हुई थी। उसी समय 2015 उन अति संवेदनशील कविताओं के साथी मैने कुछ शायरी लिखना भी शुरू कर दिया था। यहाँ मैं आपको बताना चाहूंगा कि एक इंतज़ार...महोबत। मेरी उन शुरुआती नज़्म शायरी में से एक नज़्म शायरी है एक दर्दभरी नज़्म दास्तां है जिसको अभी कुछ समय पूर्व ही मैंने अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर 9/04/2019 at 10:40am के समय आप सभी प्रियजनों के पाठन हेतु प्रकाशित किया है।
और आज अपनी आवाज के साथ अपनी इस दर्दभरी नज़्म दास्ताँ या अब यह कहना अधिक उचित होगा कि आपकी आप अपनी इस दर्दभरी नज़्म दास्ताँ को रिकॉर्ड कर के आप सभी के देखने और सुनने के लिए अपके अपने YouTube चैनल Vikrant Rajliwal पर अपलोड करते हुए मुझ को बहुत ही ज़्यादा ख़ुशी एव गर्व का एहसास हो रहा है। जिसको शायद मैं शब्दों में बयाँ ना कर सकु।
उम्मीद करता हु आपको मेरा यह प्रयास और मेरी यह दर्दभरी नज्म दास्ताँ जरूर पसंद आए।