अब सपने संजोने वाली उन आखों का क्या कसूर नादान दिल

"अब सपने संजोने वाली उन आखों का क्या कसूर नादान दिल की वो तो बस एक छवि, एक पहचान है"

 अब सपने संजोने वाली उन आखों का क्या कसूर
नादान दिल की वो तो बस एक छवि, एक पहचान है

अब सपने संजोने वाली उन आखों का क्या कसूर नादान दिल की वो तो बस एक छवि, एक पहचान है

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