*आरती बूंदी दरबार श्री सूरजमल हाड़ा की*
*(बाबोसा/भोमियां/ झुॅंझार जी महाराज)*
ऊॅं जय श्री सूरजमल, देवा जय श्री सूरजमल
आरती की बेला पधारो, धूप की बेला पधारो
संग लाओ मात सत्ती .. ऊॅं जय श्री सूरजमल।।
दास नारायण का सुत छो-2
मात छै राणी खेतु
ओ देवा मात छै राणी खेतु.. ऊॅं जय श्री सूरजमल ।
आप देव भोमिया छो - 2
धन्न हाड़ा राजा
ओ देवा धन्न हाड़ा राजा ….ऊॅं जय श्री सूरजमल ।
असव असवारी छवि न्यारी -2
चित्त राजी हो जाता …ऊॅं जय श्री सूरजमल ।
नागराज अवतारी , हाड़ौती धरा उपकारी -2
सिंह संहार कर् यौ
ओ देवा सिंह संहार कर् यौ … ऊॅं जय श्री सूरजमल।
सूरज - चाॅंद - सितारा - 2
चालै थांकी लारां
ओ देवा चालैं थांकी लारां.. ऊॅं जय श्री सूरजमल ।
कांकड़ मांय बिराजो
तुलसी मांय बिराजो
जग कल्याण करों … ऊॅं जय श्री सूरजमल।
बाजै ढोल मजीरा - 2
बाजै नंगारा
ओ देवा बाजै नंगारा.. ऊॅं जय श्री सूरजमल
पान सुपारी चढावां, खीर को भोग लगावां
लाडू पेड़ा चढावां , ओ देवा मिश्री अर मेवां ... ऊॅं जय श्री सूरजमल।
मूरत रूप रूपाळी - 2
‘हरप्रीत’ मन मौंहे
ओ देवा भगतन मन मौंहे… ऊॅं जय श्री सूरजमल।
सुमरत जो सूरजमल, सुमरत जो भोमियां जी
सुख सम्पत्त हौंवे, वांकै कुळ आणंद हौंवे।।
ऊॅं जय श्री सूरजमल देवा जय श्री सूरजमल
आरती की बेला पधारो धूप की बेला पधारो
संग लाओं मात सत्ती..
ऊॅं जय श्री सूरजमल देवा जय श्री सूरजमल।।
©Dilip Singh Harpreet
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