ना ही उम्मीदें रहेंगी अब और ना ही शिकायतें,
खामोश रहकर ही याद करूंगा तुम्हारी सारी बातें।।
खामोशी के बादल कुछ ऐसे छाएंगे,
की बातों की हल्की सी धूप को भी तरसेंगी तुम्हारी आंखें ।।
आज हंस लो जितना हंसना है मुझपे,
अहमियत तो हमारी वक्त ही बताएगा।।
लाखों की भीड़ में जब ना मिल पाओगी,
तब तुम्हें बीता हुआ वक्त याद आएगा।।।
ना भुला पाओगी तुम मुझे ,
ना ही तुम्हें मै मिल पाऊंगा।।
ज़मीं से देखोगी जब मुझे,
तो मै शीर्ष पे नज़र आऊंगा ।।।
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