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Bharatpur, Rajasthan
कबिरा ये जग कुछ नहीं, खिन खारा खिन मीठ। कालि जो बैठा मांडपै, आज मसाने दीठ।। ©Jitendra Singh
Jitendra Singh
15 Love
यदि कोई मरना चाहता है तो वह कुछ और भी चाहता है, 'मरना' कभी प्राथमिकता नहीं हो सकती।। ©Jitendra Singh
मुस्कुराकर जिसको ग़म का ज़हर पीना आ गया। है हकीकत इस ज़हां में उसको जीना आ गया।। ©Jitendra Singh
खिले पुष्प,शीतल पवन,मित्र संग,परिहास। हर रौनक लगती ज़हर,जब मन होय उदास।। ✍️जीतेन्द्र✍️ ©Jitendra Singh
12 Love
हमसे दूरियाँ ही बेहतर हैं जनाब! क्योंकि हम व्यक्ति नहीं,व्यसन हैं, लग गए तो छुड़ाना मुश्किल हो जायेगा। ©Jitendra Singh
17 Love
वर दे, वीणावादिनि वर दे! 🌷प्रिय स्वतंत्र-रव🌷 🌷अमृत-मंत्र नव🌷 🙏भारत में भर दे!🙏 🍀☘️🍃🌿🌱☘️🍀 💗🙇♂️🙇♂️💗 ©Jitendra Singh
10 Love
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